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Neele Ummeed Ki Baarish

Poetry

Neele Ummeed Ki Baarish

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मेरा लिखने का यह सिलसिला साल 2011 में शुरू हुआ था। उस वक्त ज़िंदगी में एक खालीपन आया था, कोई बहुत अज़ीज़ जो दिल के करीब था, उससे बिछड़ना पड़ा था। उस पहले दर्द ने मेरे हाथ में कलम थमा दी। वो कहते हैं ना ‘दिल टूटेगा नहीं तो कोई जोड़ेगा कैसे ?’ फिर उसके बाद के सालों में कई बार दिल टूटे, कई बार दिल जुड़े, कई बार खुद से कड़वे सवाल किए और कई बार हालातों पर रोया भी। इस सफर में मैंने लोगों को बहुत करीब से देखा, उनकी कहानियाँ सुनीं और उन्हें गहराई से महसूस करने लगा। लोगों को जिंदगी से जाते हुए देखा, लोगों को नए और पुराने होते हुए देखा । धीरे-धीरे ज़िंदगी को देखने का मेरा नज़रिया ही बदल गया । शुरुआत में मैं उन चीज़ों को पाना चाहता था जो मेरे पास नहीं थीं, क्योंकि तब पास कुछ था ही नहीं। लेकिन जब मैंने खुद को बदला और अपनी भावनाओं को साझा करना शुरू किया, तब लोग करीब आने लगे । आज मैं उन पर भी लिखता हूँ जो चले गए, उन पर भी जो साथ हैं, और खुद पर भी।
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