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Meri Katha Meri Vyatha "Jallianwala Bagh"

Historical

Meri Katha Meri Vyatha "Jallianwala Bagh"

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आज एक शताब्दी बीत गई, परंतु मेरे सीने पर लगे हजारों गोलियों के ज़ख्म आज भी ज्यों के त्यों हैं। मेरी धरती आज भी उन शहीदों के खून से रची-बसी है, जिन्हें एक शताब्दी पूर्व जनरल डायर ने गोलियों से भून दिया था। उस दिन मेरे बाग में जनरल डायर ने मौत का ऐसा तांडव खेला, जिसमें हजारों की संख्या में निहत्थे मासूम बच्चे, बूढ़े, स्त्रियाँ एवं जवान पुरुषों की निर्मम हत्या की गई। मेरा बाग बेगुनाह, निहत्थे भारतीयों के खून से भर गया। शवों का महानद बन गया। मैं, जलियाँवाला बाग, असहाय अश्रुपूर्ण नेत्रों से इस कुकृत्य को अपनी आँखों से देखता रहा। मैं निर्जीव ज़मीन का एक टुकड़ा, और कर भी क्या सकता था? मैं अपने इस दर्द को, इस जख्म को किसी के साथ बाँट भी तो नहीं सकता। हाँ, परंतु अब मैं प्रतिदिन रात को अपना दर्द उधम सिंह के बुत के साथ सॉझा कर लेता हूँ। मन थोड़ा सा हल्का हो जाता है। पुस्तक में लेखक ने जलियाँवाला बाग हत्याकांड को, उस कालखंड को, उस दौरान हुई सभी घटनाओं को सिलसिलेवार ढंग से अपने शब्दों में पिरोया है। आज भी जलियाँवाला बाग की पवित्र भूमि शहीदों के रक्त से रक्तरंजित है। यह पुस्तक आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणास्रोत है।

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