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Mere Jivan Ki Yatra

Autobiography

Mere Jivan Ki Yatra

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उपरोक्त पुस्तक “मेरे जीवन की यात्रा” का उद्देश्य यह है की व्यक्ति किस तरह से एक ग्रामीण परिवेश में से निकलकर संघर्ष करते हुए गाँव से बाहर अपनी शिक्षा ग्रहण करता हैं। कई जीवन में संघर्ष आते हैं उनका सामना करते हुए उच्च शिक्षा ग्रहण करके अपने कर्तव्य मार्ग पर वस्तर जिले के वनवासी क्षेत्र में जहां पर न तो पीने का शुद्ध पानी होता था। नहीं कोई चिकित्सा सुविधा एवं बच्चों को पढ़ने की सुविधा उपलब्ध रहती हैं उन सभी परिस्थितियों में अपना जीवन यापन करके अपने ग्रह जिले मुरैना झुण्डपुरा, कैलारस, अम्बाह, श्योपुर एवं मुरैना जिले में अपनी शासकीय सेवाएं देते हुए सेवा निवृत होकर निरंतर अपनी सेवाये देता हैं। इस पुस्तक से लोगों को यह प्रेरणा मिलेगी कि बाल विवाह होते हुए भी पढ़ाई की जा सकती हैं एवं एक अच्छा नागरिक बनके प्रदेश एवं देश को अपनी सेवाएं दी जा सकती हैं पुस्तक में सच्ची घटनाओं का वर्णन हैं जिसमें रक्तदान से लेकर बहुत से जटिल ऑपरेशन मरीजो के किये गये हैं एवं भारत के तीन प्रांतो में नेत्र शिविर एवं अन्य बीमारियों के निःशुल्क कैम्प लगाये जा रहे हैं। लोगों को मोक्ष किस प्रकार प्राप्त होगा यह भी अवधारणा पुस्तक को पढ़ने से सीखने को मिलेगी।

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