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Mere Gaanv Ko Main Phir Se Jeena Chahta Hu

Poetry

Mere Gaanv Ko Main Phir Se Jeena Chahta Hu

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मैंने भारतीय वायु सेना में बीस वर्षों तक अपनी सेवाएं दी है। लगभग बीस वर्ष की आयु में ही जब नौकरी से जुड़ा तो विज्ञान की पढ़ाई (BSE) अधूरी रह गई ( फिर वायु सेना में रहते हुए मैंने कला में खातक (B.A.) किया जिसमें हिन्दी और अंग्रेजी दोनों विषय रखें और उसके बाद अंग्रेजी विषय में स्नातकोत्तर (M.A. In English Literature) की पढ़ाई की। अपनी मातृभाषा रखने का मुझे यह फायदा भी मिला कि मैं हिन्दी में कुछ लिख सका। साथियों, में एक ग्रामीण परिवेश में पला-बढ़ा मामूली सा इंसान, वायु सेना की नौकरी के बाद, शहर की भागदौड़ और चकाचौंध के बीच आ तो गया लेकिन मुझे अपना गाँव, उसका परिवेश, रहन-सहन आदि बातें याद आती रहती हैं जो मुझे अपनी ओर बुलाती रहती हैं। शायद उस माहौल का मिलना अब मुश्किल है। इन्हीं कुछ यादों को एहसासों को समेटकर मैंने कुछ कविताएं लिखी हैं। शहर की जिन्दगी को भी लिखा है कि यह किस तरफ जा रही है। शायद आपको मेरी रचनाएं अवश्य पसन्द आएंगी। सादर धन्यवाद !

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