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Kshitij Tak

Fiction

Kshitij Tak

199

कुछ शब्द लिखें, कुछ वाक्य लिखें और बनी पहली कहानी, जिसे मेरी मित्र लक्ष्मी पांडेय (असिस्टेंट प्रोफेसर सागर विश्वविद्यालय एवं संपादक साहित्य सरस्वती पत्रिका) ने अपनी पत्रिका में स्थान दिया और अन्य पत्रिकाओं में भी मेरी रचनाएं भेज कर मुझे बहुत प्रोत्साहित किया। पिता तुल्य श्री बलवंत सिंह बघेल जी (मौनी बाबा आश्रम मझगवां) आपने घोर अंधकार के क्षणों में तिमिरापह का कार्य किया। आदरणीय श्री बी डी. आंधवान जी एवं सरिता आंधवान जी आपकी हर पल शांत उपस्थिति ने जीवन को नया संबल प्रदान किया ।
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