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Kavyanjali Vol - 3

Poetry

Kavyanjali Vol - 3

299

इस भाग में जहाँ ‘संस्कार की कसौटी’, ‘युग परिवर्तन की धारा’ और ‘दीक्षांत समारोह’ के माध्यम से जीवन के मूल्यों को टटोला गया है, वहीं ’16 शृंगार’ और ‘मुस्कान’ जैसी रचनाएँ जीवन के सौंदर्य को रेखांकित करती हैं। समाज के बदलते दौर में ‘व्यस्त माँ-बाप’ और ‘अधूरा बचपन’ जैसी कविताएँ आज के उस कड़वे सच को उजागर करती हैं जहाँ माता-पिता की व्यस्तता के कारण बच्चों का भविष्य धुंधला हो रहा है। इसके साथ ही ‘श्रम देवता’ के रूप में किसानों के प्रति कृतज्ञता, ‘करुणा का संबल’ और ‘जीवन अंतर्जाला’ के माध्यम से नारी शक्ति के अंतस को छूने की कोशिश की गई है। ‘कुंडा तीरे की बचपन गाथा’ और ‘बर्फ का गोला’ जैसी रचनाएँ आपको आपके ग्रामीण परिवेश और बचपन की स्मृतियों के गलियारों में ले जाएँगी।
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