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Kahan Ho Tum, Kahan Hain Hum

Fiction

Kahan Ho Tum, Kahan Hain Hum

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यह कहानी एक गहरी सच्चाई को उजागर करती है: कभी-कभी, जिस क्षण हम किसी रिश्ते को नाम देते हैं, उसी क्षण हम उसे टूटने का मौका भी देते हैं। जब गीत गणेश को पीछे छोड़कर चली जाती है, तो उसके बाद लालसा, एकांत और आत्म-खोज से होकर गुज़रने वाली एक भावनात्मक यात्रा शुरू होती है। काव्यात्मक गद्य और सच्ची ईमानदारी में, “कहां हो तुम कहां है हम ” प्रेम की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है जिसे पाने की कोई चीज़ नहीं, बल्कि निहसूस करने की कोई चीज़ है – पूरी तरह से, दर्द से, खूबसूरती से। अगर आपका दिल कभी टूटा है, तो यह किताब शायद वह सुकून दे सकती है जिसकी आपको तलाश थी।
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