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Poetry
Har Kirdar Kuch Kehta Hai
₹220
हर दिन व्यस्त ज़िंदगी की आपा-धापी में हम अनजाने में कितने कीमती पल और जज़्बात खो देते हैं! वजह चाहे मजबूरी हो या इच्छाएँ, पर एक ही समय में अनेकों किरदार निभाते हुए, हम सब ना जाने कितनी परतों में खो जाते हैं…. परिवार, रिश्तेदार, कार्यस्थल, समाज और ऐसे ही कई हिस्सों में बँटे हम, लगभग हर दिन, घड़ी के काँटों की ताल पर भागते-भागते अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा बस बिता देते हैं!
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