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DASSASUR Part -1

Religion and Spiritual

DASSASUR Part -1

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इस कहानी का एक मुख्य चरित्र समाज के अंधेरे पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है। उसके शब्द और कृत्य उस बुराई को दिखाते हैं जिसे हमें एक समाज के रूप में पहचानना और खत्म करना है।” यहाँ लेखक का मंतव्य देवों या असुरों की तुलना करना नहीं, अपितु केवल समाज के नकारात्मक पहलुओं की ओर ध्यानाकर्षण करना है।”‘यह हिन्दी साहित्य की उन चुनिंदा कृतियों में से एक है, जिसमें नायक कौन है और खलनायक कौन, इसका निर्णय लेखक नहीं बल्कि स्वयं पाठक करते हैं।

इस कहानी की बुनावट बहुत अनोखी है। मुख्य पात्र के जीवन के विभिन्न पहलुओं को गहराई से समझने के लिए, कहानी के कुछ दृश्यों को ‘सूत्रधार’ (Narrator) के अतीत के झरोखे से दिखाया गया है। समय की दृष्टि से अतीत और वर्तमान के बीच का यह तालमेल कहानी को एक नई मनोवैज्ञानिक गहराई प्रदान करता है, जिससे पाठक पात्रों के द्वंद्व और उनके निर्णयों को निष्पक्ष होकर समझ सकता है।

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