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Bandi Vilap
₹199
‘बंदी विलाप’ कारा में बिताए अवधि के दौरान मन में उठने वाले विचारों का काव्यात्मक संग्रह है। इसमें अकेलेपन की कुंठा, ‘बच्चों व मित्रों से मिलने की छटपटाहट’ ‘सत्ता की हनक’, ‘व्यवस्था की विसंगति’, ‘व्यक्तिगत लाचारी’ जैसे भाव की कविताएँ तो मिलेंगी ही साथ ही उस जिजीविषा की भी झलक मिलेगी, जो कभी हार नही मानता, सीधा खड़ा रहता है प्रबल झंझावातों के समक्ष । सुधीजनों व मित्रों से प्यार, स्नेह एवं प्रोत्साहन की आवश्यकता व अपेक्षा है।
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Customer Reviews
Read what others are saying about this book.
Seema kulkarni
9/21/2023
I love this book because real story
MAHESH PURBEY
9/12/2023
Superb quality and excellent
Vaibhav
9/9/2023
Very expressive and touches inner core of the heart...
