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Adhure Ehsaas Part 2

Poetry

Adhure Ehsaas Part 2

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मेरी पहली किताब की सफलता पर आप सबका बहुत बहुत धन्यवाद और आभार। अहसास जिनसे हम जीवन में रोज़ गुजरतें हैं। अपनों को, अपनी स्थितियों, अपने अनमोल रिश्तों और अपनी होने वाली घटनाओं को लेकर हमारे अंदर जो जो अहसास जागते हैं उन सबको कविताओं के माध्यम से कलम से कागज़ पर उतारने का प्रयास है इस किताब में। ज़रूर पढ़िए और महसूस कीजिए अहसासों को। राकेश लिखता है, पतझड़ अंत नहीं, दिल की बातें, भरोसा ना बहने दो, तुम सुनते नहीं, गवाही, मां तू कितनी अनमोल है, तुम ही तो हो और भी बहुत सारी अहसास भरी कविताएं। बस हुन सद् अध्यायों का संकलन है मेरी कविताओं में राकेश योवर ‘शिवांश

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