Autobiography
Abhagi ka Bhagayudai
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रतन देव सिंह अर्थ-उपार्जन के साथ कई सामाजिक संस्थाओं के अध्यक्ष रहे, जिसमें मूक-बधिर स्कूल भी था । उद्यमियों की संस्था को तीस वर्षों से अधिक चलाया और अनुषंगी इकाईयों के लिए सार्वजनिक संस्थान से सैकड़ों नियमों को अनुबंधित करवाया, जो अभी भी प्रचलन में है। बढ़ती उम्र के कारण सब सामाजिक संस्था दूसरों को सौंपते गए। कुछ लिखने की ललक जगी और यह आपके हाथों में …








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