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Autobiography
आपणी धूमर : विरासत, परंपरा और स्वाभिमान
₹299
यह पुस्तक घूमर नृत्य को केवल एक मनोरंजनात्मक कला के रूप में नहीं, बल्कि राजस्थानी नारी की भावनाओं, उसकी मर्यादा, सौंदर्यबोध, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गरिमा की अभिव्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करती है। मरुस्थलीय जीवन की कठोर परिस्थितियों के बीच विकसित यह लोकनृत्य उल्लास, संतुलन और सामंजस्य का अद्भुत प्रतीक है।
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