Pathrai Hue Log

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जाल में फँसे जानवर की तरह मैंने अपने आस-पास देखा। कैसे लोग हैं यह सब? पत्थर के बुत की तरह बेहिस और बेजान। इतने लोगों के बीच में ये चार आदमी हमें क़त्ल करके चले जाएँगे, और इनको ऐसा करने से कोई नहीं रोकेगा? उन पथराय हुए लोगों पर भटकती मेरी दृष्टि लौट आई। इनसे कोई उम्मीद करना बेकार है। मैं निराश होने लगा।

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