Khud Ko Chuno
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“खुद को चुनो” कोई वियोग संग्रह नहीं हैं ना ही कोई प्रेम संग्रह हैं, हां इसमे उदासी, हार, निराशा, पीड़ा, हिम्मत, हौसला आदि की कविताएं और लेख ज़रूर हैं, लेकिन उम्मीद भी है, वो भी ख़ुद से भले ही, वह अधमरी व टूटी फूटी ही क्यों न हों
मैं मानती हूं जीवन में उदासी, दुःख, पीड़ा, हार, जीत, खुशी हौसला, हिम्मत आदि का उतना ही महत्व है, जितना हमारी जिन्दगी की खुशियों में सुकून का होना हैं,
मैने जीवन को कभी वियोग का विषय नहीं माना, मैं मानती हूं कि रोना भी जीवन है और असमय खिलखिलाकर हंस पड़ना भी, हार भी जीवन है और किसी रोज़ अचानक जीत जाना भी, गिरना भी जीवन है, और उठना भी, ये जो जीवन है कभी एक आदमी, स्थान, वस्तु आदि पर निर्भर नहीं करता,
मैं अपने जीवन में आने वाले और जाने वाले लोगो को समान प्रेम देती हूं- क्योंकि मैं मानती हूं जाने देना प्रेम हैं, और आए हुए को स्वीकार करना भी प्रेम है,
जीवन के इन्ही कश्मकश में उलझने के बाद भी खुद को अपने आप में संजोए रखना, मेरी यह किताब – “खुद को चुनो” आपके हाथों में पहुंच चुकी हैं,
मुझे यकीन हैं इस किताब को भी उतना ही प्रेम मिलेगा, जितना आपने मुझे दिया








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