Jungle ki Marmik Pukaar

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225.00

लाखों साल से वनों में गुरुओं के आश्रम में ज्ञान विज्ञान हर विषय की शिक्षा दी जाती रही है जिसमे समाज का प्रत्येक वर्ग शामिल होता था। यहीं पर उपनिषदों की रचना हुई, वेदों पुराणों वैज्ञानिक सामाजिक साहित्य की रचना हुई, इस परंपरा का बोध आज पूरे देश को होना चाहिए यही भारत की संस्कृति को बहुत ही सुंदर बनाएगी। जंगल न केवल पर्यावरण को ही बल्कि इंसानियत को भी मार्गदर्शन देते हैं। महाभारत, रामायण, पंचतंत्र, और अन्य ग्रंथ वनों में ही लिखे गए। आजादी के बाद देश की सरकार ने विकास के नाम पर जंगलों को काट दिया। इंसान के लालच के चलते धरती के शरीर से दो तिहाई भाग चमड़ी निकाल दी गई लेकिन काटे गए वृक्षों के स्थान पर नए वृक्ष नहीं लगाएं गए। एक जीवन जहां सिर्फ अकेलापन और उदासी थी। दूर तक रेगिस्तान और बियाबान, हरियाली गायब थी। प्रकृति भी रो रही थी, क्योंकि इंसान ने कुछ गरीबी में. कुछ लालच में कुछ अपने घमंड में वृक्षों का विनाश कर दिया। गौरैया चली गई. अनेक वन्य जीव जंतु विलुप्त हो गए, मधुमक्खियाँ, जुगनू, मालूम नहीं कहां है। यही जंगल की मार्मिक प्रकार है।

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1 review for Jungle ki Marmik Pukaar

  1. Diyank8447831786

    Exellent hai aur yah bhi hai ki kitab marvolous hai

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