इश्क़दारी’ केवल एक काव्य-संग्रह भर नहीं है, बल्कि यह उन सूक्ष्म और गहन भावनाओं का संग्रह है, जिन्हें मैंने अपने अब तक के जीवन-सफ़र में जिया, महसूस किया और शब्दों में ढालने का साहस किया। इसमें प्रेम की कोमलता है, वियोग का शोक है, संयोग की अनायास प्रसन्नता है, और मोह तथा क्रोध जैसे मानवीय आवेगों की तीव्रता भी। ये भावनाएँ देखने में भले ही अत्यंत व्यक्तिगत प्रतीत हों, परंतु जब हम अपने अनुभवों से बाहर निकलकर संसार को निहारते हैं, तो महसूस होता है कि यही भावनाएँ तो इस समूचे जगत की धुरी हैं- वही अदृश्य शक्ति, जो हर मनुष्य के जीवन को गति देती है।
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