Dreambook
Login
Back to Store
Adhkhile Phool | The un-ripened thoughts inscribed in words

Poetry

Adhkhile Phool | The un-ripened thoughts inscribed in words

249

कविता और ग़ज़ल किसी सेहरा में बदली का छा जाना है, कड़कती धूप में खेत में काम करते मजदूर के लिए अमरूद के पेड़ की छाँव है। वो ठंडी हवा है जो पसीने की धार को गर्दन से उतारकर पूरे बदन पर जब बिखेर देती है, मानो एक बर्फ का टुकड़ा कपड़ो में डाल दिया हो। मैंने भी इन्ही बातों को ध्यान में रखकर कुछ लिखने की कोशिश की है। मेरी उम्मीद है कि इस किताब में लिखे अशआरो से कोई शख़्स खुद को जोड़ पाए।

1
In Stock & Ready to Ship
100% Secure Checkout

Customer Reviews

Read what others are saying about this book.

No reviews yet.

Be the first to review "Adhkhile Phool | The un-ripened thoughts inscribed in words"!

Chat with us