Adhkhile Phool | The un-ripened thoughts inscribed in words

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कविता और ग़ज़ल किसी सेहरा में बदली का छा जाना है, कड़कती धूप में खेत में काम करते मजदूर के लिए अमरूद के पेड़ की छाँव है। वो ठंडी हवा है जो पसीने की धार को गर्दन से उतारकर पूरे बदन पर जब बिखेर देती है, मानो एक बर्फ का टुकड़ा कपड़ो में डाल दिया हो। मैंने भी इन्ही बातों को ध्यान में रखकर कुछ लिखने की कोशिश की है। मेरी उम्मीद है कि इस किताब में लिखे अशआरो से कोई शख़्स खुद को जोड़ पाए।

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