Irshya Ki Fasal

249.00

यह उपन्यास एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसने अपने दम पर वक्त के झंझावातों से निकल कर ऊंचाइयों को छुआ। अपनों की ईर्ष्या और अहंकार को नकारता हुआ जीवन भर वह सबके के लिये कुछ न कुछ करता रहा। लेकिन, जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर उन्हीं लोगों के रूखे व्यवहार ने उसको भावनात्मक ऊंचाई से व्यावहारिक धरातल पर ला कर पटक दिया।

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